आज सवेरे ज़ब मुंडेर पर कौवे
को बैठा देखा
होंगे मेरे पितृ मन मेँ यहीँ सोचा
थाली भर पकवान बनाये
भर लिया दूध को लौटा
आ जाओ पितृ महाराज खाना खा जाओ
जोर सें आवाज लगाई...
फिर ना जाने मन कैसी कैसी बातें
याद मुझें आयी
ज़ब वो जिन्दा थे क्या टाइम सें उन्हें चाय भी पिलाई
यहीँ सोच कर आँखे मेरी भर आयी
आता नही कोई खाने जाने के बाद
जीतें जी ही कर लो सेवा मेरे भाई
उड़ गया कोवा भी यहीँ बात सिखाकर
एक कोर भी ना उसने खाया,,,,
-मंजू आस्था
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