लिखे
लिखे न सिर्फ चाँद सितारों पर
लिखे ज़मीन पे रहने वालो पर भी
लिखे न सिर्फ मेहबूब की आखों पर
लिखे मेहबूब के संघर्ष और उसके हौसले पर भी
लिखे न सिर्फ पेड़ पे लगे फूलो पर
लिखे उनके मौन दुःख पर भी
लिखे न सिर्फ हरियाली पर
लिखे जोतने वाले पर भी
लिखे न सिर्फ कलकल बैठी नदियों पर
लिखे उनमे बह रही इंसानी गन्दगी पर भी
लिखे न सिर्फ पहाड़ो की सुंदरता पर
लिखे उनपर होरही निर्दयता पर भी
लिखे न सिर्फ भूत भविष्य पर
लिखे आज के सत्य पर भी
लिखे
लिखे न सिर्फ चाँद सितारों पर
लिखे ज़मीन पे रहने वालो पर भी
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