तेरी चाहतों में उलझे रहे इस कदर
काश मुलाकात हो तो मौजा यार हो जाये
मिलो कभी ख्यालो में तो कुछ गुफ्तगू कर लें
उजालो में मशरूफ हो बात जाया ना हो जाए।।
-महेश "माही "
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