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डूबता तारा

                
                                                         
                            आसमान से टूटा तो फिर किधर जाऊंगा
                                                                 
                            
तूने मुझे ठुकराया तो मैं बिखर जाऊंगा
बाद मेरे आयेंगी मंजिल तुझे नजर कई पर दूर तक देखने पर भी मैं तुझे नजर नहीं आऊंगा
आयेंगी बहारें हर साल दर साल में
बस मैं लौट कर दुबारा कभी नहीं आऊंगा
पढ़ती होगी खत वो जो रखे थे सम्भाल कर तूने
पर मैं वो माजनून बन गया जो अब तेरी समझ में नहीं आऊंगा
कि मिल जाएंगे मुझ जैसे तुझको बहुत
पर चाह कर भी तेरे अब ना मैं तुझे मिल पाऊंगा।
-महेश माही
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3 महीने पहले

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