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स्वतंत्रता

                
                                                         
                            स्वतंत्रता:
                                                                 
                            
स्वतंत्रता ही शौर्य है
स्वतंत्रता ही शान्ति है,
स्वतंत्रता की सांस में
स्वतंत्र सशक्त आवाज है।
लय डूबा था,भाषा डूबी
स्वर डूबा था,शक्ति थी डूबी,
मन डूबा था, मानव डूबा
भारत तब अशान्त बहुत था।
तब जन-जन ने स्वधर्म निभाया
स्वतंत्रता को मन से गाया,
स्वतंत्रता जटिल बहुत थी
पर संघर्ष में आग विपुल थी।
लहू कहीं पर, शान्ति कहीं पर
पग-पग पर व्यवधान खड़े थे,
राह-राह पर मोड़ कठिन थे
पर जनता के आसमान असीम थे।
अब स्वतंत्रता का पेड़ लगा है
रोज इसे तन-मन से सींचो,
पुष्प इसके,सुगन्ध इसकी
फल भी खाओ, सबको खिलाओ।
अक्षुण्ण रखना, काम हमारा
जय-जयकार से इसे उठाना,
यह दीप हमारा जग में न्यारा
सत्य कहूँ यह मन का प्यारा।
-महेश रौतेला
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2 महीने पहले

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