तुम भी तो कुछ बोलो ना
क्या खोया क्या पाया जग में,अपनी जेब टटोलो ना।
लेकर के क्या जाओगे तुम,अपना भी मुंह खोलो ना।
छुपा रखी जो बात मुझसे,गिरह की गांठ खोलो ना।
इतनी बात कहां से लाऊं, तुम भी तो कुछ बोलो ना।
बल -बुद्धि व धन -धान्य ले, मैं अहम् विष पीता रहा।
काल गति के पहिए चढ़कर, सुखद जीवन जीता रहा।
नहीं आता सदा ज्वार सागर में,तुम भी तो कुछ तोलो ना।
इतनी बात कहां से लाऊं, तुम भी तो कुछ बोलो ना।
गुरु के संग रुह हुई जब, रब के दर्शन पाया था।
ब्रह्म ज्ञान लिया अर्जुन ने जब,देख विराट रूप भरमाया था।
एक को जानो,एक को मानों, इधर-उधर मत डोलो ना।
इतनी बात कहां से लाऊं, तुम भी तो कुछ बोलो ना।
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