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शिक्षक दिवस

                
                                                         
                            बिन शिक्षक की शिक्षा होगी,अंधकार में मारें तीर।
                                                                 
                            
बिना ज्ञान के पत्थर पूजें, फूट गए हैं तकदीर।

बिन बादल वर्षा न होगी, चाहे शोर मचा लो तुम।
शिक्षक बिन शिक्षा न होगी,चाहे जोर लगा लो तुम।

नहीं होवे बिन शिक्षक के,ज्ञान-विज्ञान-आखर ध्यान।
शिक्षा के बिन इंसां होता,सींग,पूंछ बिन पशु समान।

बिन बाती दीया नहीं जलता चाहे तेल भरा लो तुम।
शिक्षक बिन शिक्षा न होगी,चाहे जोर लगा लो तुम।

करते हैं शिक्षक का आदर,वो बुलंदियों को पाते हैं।
जो न समझे शिक्षक को,दर-दर की ठोकर खाते हैं।

बिन शिक्षा जीवन न चमके, चाहे दीप जला लो तुम।
शिक्षक बिन शिक्षा न होगी,चाहे जोर लगा लो तुम।

शिक्षा शेरनी का वह दूध है जो पियेगा वह दहाड़ेगा।
अंधकार के सीने को,वह शिक्षित हो कर फाड़ेगा।

बिन लहर नदी न बहती,चाहे नाव चला लो तुम।
शिक्षक बिन शिक्षा न होगी,चाहे जोर लगा लो तुम।

शिक्षा पहले शिक्षक है, शिक्षा होती बाद में।
शिक्षक दिवस मना रहे,डॉ सर्वपल्ली की याद में।
-महेश तंवर
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एक महीने पहले

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