रिमझिम रिमझिम बारिश आई
मन में वह नयी उमंग लाई
आओ बच्चों आओ बच्चों
सावन की नयी बुहार लाई
रिमझिम बारिश जब आती है
भीगनें को मन तब करता हैं
मोर भी अपने पंख फैलाकर
धरा पें नाच दिखाता है
जब काले-काले बादल आते,
मोर खुशी से नाच दिखाते ।
पंख फैलाकर झूम-झूमकर,
सावन का संदेश सुनाते ॥
रिमझिम रिमझिम पानी बरसा
रिमझिम रिमझिम पानी बरसा,
धरती का हर कोना हरसा।
आओ मिलकर खेल रचाएँ,
गाएँ, कूदें, हँसते जाएँ॥
टप-टप बूंदें, छम-छम पानी,
हँसती आई वर्षा रानी।
नन्हे-नन्हे पग थिरकाएँ,
गीत नए सब मिलकर गाएँ॥
कागज़ वाली नाव चलाएँ,
बहते जल के संग इठलाएँ।
आगे-आगे नाव हमारी,
पीछे हँसी की फुलवारी॥
मोर नाचे पंख पसारे,
देखे उसको बच्चे सारे।
कू-कू करती कोयल प्यारी,
लगती कितनी छवि न्यारी॥
टर्र-टर्र मेंढक गुनगुन बोले,
झूले डाली-डाली डोले।
तितली रंग बिखेरती जाए,
मन में नई उमंग जगाए॥
बगिया हँसी, हँसे फूल सारे,
महके आँगन, महके द्वारे।
पेड़ हवा के संग लहराएँ,
मीठे-मीठे गीत सुनाएँ॥
रिमझिम रिमझिम वर्षा आई,
संग में मीठी खुशी भी लाई।
नाचो, गाओ, हँसो खिलखिल,
बरसो बादल रिमझिम-रिमझिम॥
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