मिरी मोहब्बत का अंजाम पूछिए,
कि इक तलक देखूँ उनको, उनसे मिरां नाम पूछिए,,
हजारों बार गुज़रा हूं उनकी बिखरी छांव से,
वो क्या मिरे पांव पहचान ना सके,
वो देखते ही हैं तो बहुत कम नज़र से,
मिरे आने जाने का बस उनसे हिसाब पूछिए,,
तारिफ तो दोनों की जुबां पे है,
बस इक मुलाक़ात की ओर बढ़े,
दोनों की खूबसूरती का ईमान पूछिए,
जो तुमको मिरी जान अगर मिल जाए,
उससे मिरी तरफ से हाल पूछिए,
उससे मिरी जिक्र एहसास पूछिए,
उससे उसकी मोहब्बत का नाम पूछिए,
उससे मोहब्बत के बाद एक पल गुजरने का इंतजार पूछिए।।
- ललित दाधीच
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