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वृद्धाश्रम

                
                                                         
                            वृद्धाश्रम बदलते ज़माने का,
                                                                 
                            
बुजुर्गो का अपना घर है,
वहां के रहने वाले आपके मित्र हैं।
पचास की उम्र पार कर चुके,
सक्षम लोग अपने लिए घर का,
बन्दोबस्त करने के लिए सोचें,
उस घर में परिवार का कोई भी, व्यक्ति अधिकार ना जताए।
ओल्ड एज होम का व्यापार,
दिनों-दिन यूं ही नहीं बढ़ रहा,
समाज में बुजुर्गों के प्रति,
बढ़ रही गलत धारणा उसका, जिम्मेदार बनता जा रहा है।
वृद्धाश्रम में मां बाप को,
भेजने वाले पुत्र पुत्रियां ,
समाज में तिरस्कृत नहीं होते,
उनको देखकर और भी लोग,
अपने बुजुर्ग को वृद्धाश्रम,
छोड़कर वापस चले आते हैं।
यह सोंच सामाजिक जहर है,
फिर भी दिनों दिन समाजिक,
संस्कृति संस्कार को दूषित कर,
नई पीढी को ग़लत संदेश,
देने का घृणित कार्य कर रही है।
-कुलदीप शुक्ला
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2 महीने पहले

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