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फिर क्यों अहंकार में इठलाऊं मैं

                
                                                         
                            जब मृत्यु नहीं निश्चित मेरी,
                                                                 
                            
क्यों आगे की प्लानिंग बनाऊं मैं,
ट्रेन दुर्घटना में मर जाऊं ,
प्लैन क्रेश में मर जाऊं ,
सड़क दुघर्टना में मर जाऊं,
हार्ट अटैक से मर जाऊं।
जब मौत नहीं निश्चित मेरी,
फिर क्यों अहंकार में इठलाऊं मैं,
अपराध से पैसे कमाऊं मैं।
जब सब अनिश्चित है जीवन में,
समाज में अच्छे कार्य करुं,
जीवन को आदर्श बनाऊं मैं।
जीवन को आदर्श बनाऊं मैं।।
-कुलदीप शुक्ला
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2 घंटे पहले

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