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वो कुछ तो था

                
                                                         
                            न जाने वो कौन से रिश्ते थे,
                                                                 
                            
वो कभी साथ चले और आगे बढ़े,
और न जाने किस मोड़ पर
वो हमसे छूट गए।

न जाने वो कौन से रिश्ते थे,
वो कभी साथ चले और आगे बढ़े,
और न जाने किस मोड़ पर
वो हमसे छूट गए।
जब मैंने उन्हें अपने पास पाया,
तो क़द्र नहीं की मैंने।

जब मैंने उन्हें अपने पास पाया,
तो क़द्र नहीं की मैंने।
जब क़द्र करना शुरू कि,
तो अपने पास नहीं पाया उन्हें।
कुछ रिश्ते ख़ामोशी के पन्नों में
उलझकर रह गए,
और हम भी कुछ पछतावे में रह गए।

जब चीज़ें समझने लगे,
तो पाया कि वो न कोई रिश्ता था,
न ही कोई एहसास

जब चीज़ें समझने लगे,
तो पाया कि वो न कोई रिश्ता था,
न ही कोई एहसास—
बस वो कुछ तो था,
एक सुंदर-सा एहसास।

बस वो कुछ तो था,
एक सुंदर-सा एहसास
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2 सप्ताह पहले

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