सूनी राह में ....
परछाई बन सके तो आना ,
ठहर जा ए -राही !
वरना तन्हा चल लेने दे मुझे ।
लहरा लहरा ....
सावन की बौछार बन,
मेरा अंतर्मन भिगो सके तो आना ,
वरना तन्हा चल लेने दे मुझे ।
लता बन....
मेरे भावना रूपी तरु को ,
आगोश में ले सके तो आना ,
वरना तन्हा चल लेने दे मुझे ।
कुसुम बन....
मेरी जीवन रूपी बगिया को ,
महका सके तो आना ,
वरना तन्हा चल लेने दे मुझे ।
शशि बन.....
मेरे जीवन का तिमिर ,
हर सके तो आना ,
वरना तन्हा चल लेने दे मुझे ।।
-कृष्णा आर्या
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