आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

.......मिथिलाक गौरव........

                
                                                         
                            जनक ज्ञान सँ उज्ज्वल धरती,
                                                                 
                            
जानकीक पावन मान।
रामक मर्यादा सँ शोभित,
ई मिथिला भारतक शान।।

विद्यापतिक मधुर गीतावली,
आबो प्रेमक रस बरसाबै।
मैथिलीक मधुर स्वर सँ,
सभक हृदय अपन बनाबै।।

पाग हमर सम्मानक मुकुट,
मधुबनी हमर पहचान।
माछ, मखान, पानक सुगंधि,
बढ़बैत मिथिलाक मान।।

एहि माटिक कण-कण गाबै,
त्याग, प्रेम आ ज्ञानक गान।
जननी-जनमभूमिक माटी,
स्वर्ग सँ बेसी प्यार।।

ओकरा लेल जानो कुर्बान,
ई मिथिलावासी के संस्कार।
आब चलू फेर सँ प्रण करी,
मिथिलाक मान बढ़ाएब।।

जनक-जानकीक पावन आदर्श,
जीवनमे अपनाएब।
जय मिथिला,
जय मैथिलान।।
-कोमल
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर