आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

एक एहसास

                
                                                         
                            देर रात के सूनेपन में,
                                                                 
                            
देर रात के खालीपन में,
बात करनी थी तुमसे जो…
उस बात के अधूरेपन में…

देखा था जो ख़्वाब मिलकर हमने,
उन अनदेखे ख़्वाबों के सूनेपन में…
कुछ लफ़्ज़ थे जो कह न सके,
कुछ एहसास थे जो सह न सके,
कुछ पल थे जो ठहर गए,
कुछ रिश्ते थे जो बिखर गए…

आज भी चाँद से पूछती हूँ,
कहाँ खो गई वो रात हमारी,
जिसमें तुम थे, मैं थी,
और अधूरी-सी थी एक कहानी हमारी…

नींद आँखों से रूठ गई,
यादों ने फिर दस्तक दी,
तुमसे कहनी थी जो बात कभी,
वो आज भी दिल में ही रह गई…

- कोमल की कलम से
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर