ऐ ग़ैर समझनें वाले तूं, गैरत का कुछ ख्याल तो कर।
ए बेगानेपन के तेवर, क्यों आज दिखाये जाते हैं।।
तूं सुन्दर -सुन्दर -सुन्दर है, तन और मन दोऊ है सुन्दर।
तेरा दिल पर अस रंग चढ़ा, चाहे न भुलाये जाते हैं।।
जब आग लगी हो दिल में तो, फिर दिल से क्या फरियाद करें।
कोई और वहां दिलदार है क्या, क्यों दिल फिसलाये जाते हैं।।
कुछ आप कहे, कुछ मैंने सुना, कुछ मैंने कहा कुछ आप सुने।
ये कुछ ही कुछ में कुछ तो है, क्यों कुछ को छिपाए जाते हैं।।
जहां खौफ का मंजर छाया हो, बेख़ौफ़ रहें तो कैसे रहें।
बेख़ौफ़ बना कर क्यों सबको, वो खौफ सुनाए जाते हैं।।५।।
एक जाल बना कर फरेबों का, उसमें दो दिल को फास लिया।
फिर दिल से दिल को गैर बना, क्यों दिल फिसलाये जाते हैं।।
चेहरे से खौफ जो उतर गया, बेख़ौफ़ नज़ारा क्या कहना।
अब तीर -ए-नज़र यूं चला -चला, क्यों सबको सताये जाते हैं।।
-कृष्ण मुरारी पाण्डेय
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