पसंद है इतना ज्यादा हमे वो एक ख़ास शख़्स कि
उसकी हर एक छोटी निशानी सर पे उठा रहे है हम
माना वो दूर है हमसे इतना कि एक झलक तक न मिले
मगर फिर भी अपनी तरफ़ से ये साथ निभा रहें हैं हम
उसका चलना और रुकना उसकी चुप्पी और मुस्काना
वो हर एक हरकत जहेन में आज भी बसा रहे है हम
लोग कह रहें हैं हमसे कि आगे बढ़ क्यूं नही जाते सब छोड़
जिस्म से जान जुदा मरने पर ही होगी उन्हें समझा रहे हैं हम
ये तमाम बातें साझा आज भी हम सिर्फ़ उनसे ही करते हैं
तब उनकी आखों से कहते थे अब तस्वीर से बता रहे हैं हम
पछतावा तो है बस इतना कि उसने कुछ बोला क्यूं नहीं हमे
मुझ पर भरोसा उसका क्यूं कम पड़ गया नही समझ पा रहे हैं हम
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