मिलें जो ज़ख्म दुनिया से ,कभी वो भर नहीं सकते।
कभी रिश्तों की खातिर हम ,झुका ये सर नहीं सकते।।
भले नफरत करे दुनिया, या अब शूली चढ़ा दें यह,
खड़े चौखट पे रब तेरे,तो अब हम डर नहीं सकते।।
-सूरज तिवारी
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