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गीत विष्णुपद छंद

                
                                                         
                            श्रद्धा अर्पित इन चरणों में,प्रीत नमन करती।
                                                                 
                            
प्राण नाथ बन जाओ कान्हा,चरण सदा धरती।।

चर्चा करती सखियों से नित ,तेरे नाम हुई।
बाँह पकड़ता नदी किनारे, अब बदनाम हुई ।
प्रणय सूत्र में बँधना चाहें,राधा दुख सहती।
प्राण नाथ बन जाओ कान्हा, चरण सदा धरती।।

मन मंदिर में बसे कन्हैया, किससे पीर कहें।
अँखियाँ ओझल हुई अभी भी, मन में धीर धरें।।
बड़ी अभागिन हूँ मैं मोहन,किससे अब कहती।
प्राण नाथ बन जाओ कान्हा, चरण सदा धरती ।।

कृष्ण! पुकारें बंसी गाएँ,अब वह घूम रहें।
कहाँ गई राधा ग्वालों से,अब वो पूछ रहें।।
विरह अग्नि के दुख में राधा,जीवन से जलती।
प्राण नाथ बन जाओ कान्हा,चरण सदा धरती।।
-सूरज तिवारी
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2 महीने पहले

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