क्या है गुनाह यार बताया न जाएगा
तू साँस में बसी है भुलाया न जाएगा
तेरा कसूर कुछ नहीं फिर भी ये सोच कर
तुझसे किया था वादा बताया न जाएगा
हम पिंजरे को खोल परिंदे उड़ा रहे
बंधक किसी को भी बनाया न जाएगा
खाई कसम थी संग जो जीने की ए खुदा
तस्वीर को गले भी लगाया न जाएगा
मेरे रकीब तू ही बता तुझसे क्या कहूँ
अब बोझ जिंदगी का उठाया न जाएगा
-सूरज तिवारी
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