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छाए है बदरा

                
                                                         
                            कौंध रही हैं चंचल चपला ,प्रियतम है खतरा।
                                                                 
                            
घर आजा ओ साजन प्यारे, छाए हैं बदरा।।

आसमान में काले बादल,प्यारे है लगते।
रिमझिम सावन भीग रहे है, विलग न मन रमते ।।
संगी साथी कजरी खेलें, सिर डालें गजरा।
घर आजा ओ साजन प्यारे,छाए है बदरा ।।

गंगा -जमुना सा संगम हो, मेरा है सपना।
भरा जलाशय मेंढक गाते, टर्र- टर्र सजना।।
इस सावन हो मिलन हमारा, रंग खिले गहरा।
घर आजा ओ साजन प्यारे, छाए है बदरा ।।

जीवन में अनहोनी कब हो, खबर नहीं मुझको।
इसीलिए आवाज लगाते, साजन हम तुझको।।
अपनी पीड़ा तुमसे कहती, फैलाऊँ अचरा।
घर आजा ओ साजन प्यारे, छाए हैं बदरा।।
-सूरज तिवारी
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2 महीने पहले

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