आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मतवारे ह्वै गए

                
                                                         
                            काजर वारे नैन हमारे, उन पर जोबन वारे
                                                                 
                            
पनघट पे जब दरस भये तो, हम तो सब जग हारे
प्रीति-नगरिया के रस्ते हम, बंजारे ह्वै गए
साँवलिया की एक झलक में, मतवारे ह्वै गए

चुनरी मेरी धानी-धानी, मनवा फागुन-फागुन
बिना सलोने पीत वसन के, सूने लागे सावन
कदम की छैयाँ बाट जोहते, नैन थके अब मेरे
साँझ भई पर आये नाहीं, मेरे प्रीत-लुटेरे
सजल नयन के अश्रु हमारे, सितारे ह्वै गए
साँवलिया की एक झलक में, मतवारे ह्वै गए

प्रेम अगन में जरि-जरि के मैं, कुंदन सी भई गोरी
साँवरिया ने अपने रंग में, रंगी राधिका भोरी
छूटी मेंहदी, फीके कँगना, सब शृंगार तजे हैं
मन-मन्दिर में केवल मेरे, नटवर लाल सजे हैं
जग के सारे झूठे नाते, किनारे ह्वै गए
साँवलिया की एक झलक में, मतवारे ह्वै गए

मौन अधर अब गावन लागे, प्रेम-सुधा की बानी
देखि छटा उस नन्दलाल की, मैं तो भई दीवानी
प्रीत हमारी पावन जैसे, यमुना जी की धारा
तन-मन सब कुछ अर्पण कीन्हा, जपुं मैं नाम तिहारा
भक्ति-सुधा के निर्मल जल के, फव्वारे ह्वै गए
साँवलिया की एक झलक में, मतवारे ह्वै गए

काजर वारे नैन हमारे, उन पर जोबन वारे
पनघट पे जब दरस भये तो, हम तो सब जग हारे
प्रीति-नगरिया के रस्ते हम, बंजारे ह्वै गए
साँवलिया की एक झलक में, मतवारे ह्वै गए
-भानु शर्मा रंज
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर