आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हैं झील से गहरे नैन उनके

                
                                                         
                            हैं झील से गहरे नैन उनके,
                                                                 
                            
मुख पर शीतल-सी मुस्कान है
रूप उनका अनुपम है,
जिसका न कोई बखान है।

चेहरे का वो तेज ऐसा,
कि चाँद भी देखे शर्मा जाए।

होठों पर लाली ऐसी,
देखे अगर सुध-बुध खो जाए।
मुरली की तान ऐसी मनोहर उनकी,
पूरी सृष्टि वृंदावन हो जाए।

घुँघराले बाल ऐसे,
सावन के मेघ भी लज्जा जाए।
चले ठुमक - ठुमक ऐसे,
के ब्रज की गलियां भी खिलखिलाए।

शृंगार ऐसा दिव्य, अलौकिक उनका,
शिव भी मोहित हो जाए।

चरण-कमल गंगा से पवित्र,
तर्जनी पर सुदर्शन शोभे,
कनिष्ठा पर गोवर्धन विराजे।

राधा जपते निरंतर,
और जो भी जपे उनका नाम,
वैकुंठ धाम को वो प्राणी प्राप्त हो जाए।

हैं अनेकों नाम और लीलाएँ उनकी,
हैं सर्वोत्तम, उत्तम सारथी वो।
सखा मेरे, प्रियतम मेरे,
है मेरे कृष्ण मुरारी वो।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर