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खुश रहने की वजह

                
                                                         
                            ज़िंदगी ने पूछा मुझसे,
                                                                 
                            
“खुश रहने की वजह क्या है?”
मैंने हँसकर इतना कह दिया—
“हर साँस अभी बची हुई है।”
ना महलों की चाहत मुझको,
ना दौलत का अभिमान है,
दो मीठे बोल जो मिल जाएँ,
बस इतना ही अरमान है।
कभी चाय की प्याली में खुश हूँ,
कभी बारिश की बूँदों में,
कभी अपनों की बातों में खुश हूँ,
कभी भूली-बिसरी यादों में।
जो मिला, उसका शुक्र मनाता,
जो गया, उसे जाने देता हूँ,
जो पास नहीं, उसकी यादों को
दिल में प्यार से रहने देता हूँ।
कल कैसा होगा, कौन जानता,
फिर क्यों आज उदास रहूँ?
जो पल मेरी मुट्ठी में है,
क्यों न उसमें खुलकर हँसूँ?
कोई रूठे तो प्यार से मनाऊँ,
कोई जाए तो दुआ दूँ,
कोई बिना वजह याद करे मुझे,
तो मैं भी उसे याद कर लूँ।
ज़िंदगी बहुत बड़ी नहीं,
बस छोटे पलों की कहानी है,
जिसने आज में जीना सीख लिया—
उसकी हर सुबह सुहानी है।
खुश रहने को वजह नहीं चाहिए,
बस दिल में सुकून होना चाहिए,
ज़िंदगी चाहे जैसी भी हो—
हर पल को जीने का हुनर होना चाहिए
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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