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शिकस्ता ख़्वाबों के बाद ।

                
                                                         
                            शिकस्ता ख़्वाबों के बाद ।
                                                                 
                            

टूटे ख़्वाबों की किरचों से, राह नई बनानी है,
आँखों में जो नमी उतर आए, उसको ताक़त बनानी है।

हर सपना पूरा हो जाए, यह दुनिया की रीत नहीं,
हर ठोकर में सीख छिपी है, हर शिकस्त भी जीत सही।

जो कल तक अपना लगता था, आज अगर वह दूर हुआ,
उसके जाने से जीवन का, सफ़र कहाँ मजबूर हुआ?

गिरकर उठना, फिर चल देना—यही सफ़र की शान है,
टूटे सपनों के बाद भी, ज़िंदा दिल इंसान है।

बीता कल आवाज़ दे तो, पीछे मुड़कर मत देखना,
जो हाथों से रेत फिसल गई, उसको फिर से मत समेटना।

वक़्त नदी की धार है, वापस कभी न आती है,
जो इसकी क़दर समझ लेता, उसकी राह सँवर जाती है।

कल की गलती बोझ नहीं, यदि उससे सीख लिया,
सूना पड़ा जो आज मिला है, उसको फिर से सींच लिया।

जो पल आज तुम्हारा है, उसको व्यर्थ न जाने देना,
आने वाले कल के लिए, आज को मत खो देना।

मुश्किलें दरवाज़े पर आकर, दस्तक देती जाएँगी,
कभी धूप बन जलाएँगी, कभी आँधी बन आएँगी।

लेकिन तू पत्थर बनकर, अपने पथ पर डटा रहना,
रात चाहे जितनी गहरी, सुबह की आस लगाए रखना।

सूरज ने कब डरकर अपनी, रोशनी कम की है?
आँधी ने कब पर्वत की, ऊँचाई कम की है?

राह कठिन हो, पाँव थकें, फिर भी रुकना मत,
मंज़िल दूर दिखाई दे तो, अपना सपना छोड़ना मत।

हर सफ़र में साथ मिले, यह ज़िंदगी की शर्त नहीं,
हर मोड़ पर कोई अपना हो, यह भी कोई बात नहीं।

कभी अकेले चलना पड़ता, अपनी राह बनाने को,
अपने भीतर दीप जलाना, अँधियारा मिटाने को।

जब दुनिया ख़ामोश रहे, खुद अपनी आवाज़ बनो,
जब कोई हाथ न थामे, खुद अपना विश्वास बनो।

साथ मिले तो शुक्र करो, न मिले तो डरना क्या?
अपने पाँवों पर चलना सीखो, फिर किसी से कहना क्या।

सोना आग में तपकर ही, अपना मूल्य बताता है,
पत्थर चोटें खाकर ही, सुंदर रूप में आता है।

वैसे ही इंसान समय की, भट्ठी में ढलता है,
दर्द सहकर, ठोकर खाकर, धीरे-धीरे पलता है।

हर चोट को अभिशाप न समझो, उसमें सीख छिपी होती है,
हर आँसू की बूँद के भीतर, एक नई उम्मीद होती है।

शिकस्ता ख़्वाबों से डरना, जीवन की पहचान नहीं,
गिरकर फिर उठते रहना—इससे बड़ी उड़ान नहीं।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

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