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तुझ से नैन लडाए कौन

                
                                                         
                            मौन का प्याला पीकर बैठा,
                                                                 
                            
तुझसे नैन लड़ाए कौन ।
भूल गया हूॅं दिल अपना ही ,
तेरे दिल में आए कौन ।।

बस्ती बस्ती ढूंढ रहा है,
बंजारा बंजारिन को ।
इन गहरे दिल के ज़ख़्मों पर,
मरहम अजी लगाए कौन ।।

चंदा आसमान में बैठा,
जाने कब से घूर रहा है ।
धरा छोड़ कर गयी चांदनी,
उसको पुनः बुलाए कौन ।।

कोयल की मीठी बोली भी,
अब तो कड़वी लगती है ।
कोयल फिर से मीठा बोले,
उसको भला बताए कौन ।।

दर्पण मुॅंह लटकाए बैठा,
कब से रस्ता देख रहा है ।
चला गया है जो इस घर से ,
उसको यहां बुलाए कौन ।।

"कमल" नहीं यह तेरी दुनिया ,
दिल वालों की बस्ती है ।
तेरा दिल तो टूट चुका है,
तुझको यह समझाए कौन ।।

 
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14 घंटे पहले

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