जीवन में आराम का, कहीं न कोई रूप ।
कहीं सताती व्याधि है कहीं विरह की धूप ।
चंदा भी करता नहीं जीवन में आराम ।
सर्दी हो या ग्रीष्म हो, चलना उसका काम ।
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