आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हर रात की सुबह

                
                                                         
                            हर रात की सुबह होती है,
                                                                 
                            
बातों से ही सुलह होती है।
छट जाता है घना अंधेरा,
सूरज लाता है नया सवेरा।

बस थोड़ा सा विश्वास रखें,
अपने मन से संवाद करें।
टूटे हौसलों को फिर जोड़ें,
सपनों को फिर आबाद करें।

हर ठोकर कुछ सिखाती है,
हर पीड़ा मजबूत बनती है।
गिरकर जो उठना सीखते हैं,
मंज़िल उन्हें पास बुलाती है।

चलते रहना ही जीवन है,
रुक जाना तो अंत होता है।
जो विश्वास नहीं खोते हैं,
उनका कल स्वर्णिम होता है।
—कमल किशोर झा 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर