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वक्त़ के आईने में

                
                                                         
                            वक्त़ के आईने में चेहरों का असर देखा है,
                                                                 
                            
मैंने हर मुस्कुराहट के पीछे सफ़र देखा है।

धूप ने लाख मेरे पांव जलाने चाहे,
हौसलों ने मगर हर मोड़ पर घर देखा है।

जो मिले दर्द, उन्हें गीत बनाकर जीते,
हमने कांटों में भी खिलता हुआ स्वर देखा है।

सिर्फ़ दौलत से कभी आदमी ऊंचा न हुआ,
मैंने किरदार का ही सबसे बड़ा दर देखा है।

झूठ कुछ रोज़ चमकता है उजालों की तरह,
सच को हर दौर में सूरज- सा अमर देखा है।

रिश्ते लफ़्ज़ों से नहीं,दिल से निभाएं जाते हैं,
मैंने ख़ामोश निगाहों में समंदर देखा है।

जो झुका प्रेम से, वह और भी ऊंचा निकला,
मैंने फलदार दरख्तों का यही हुनर देखा है।

नफरतें बांटने वालों का कहां नाम रहा,
प्यार करने वालों का हर दिल में जगह देखा है।

मेरी पहचान न पूछो, मेरे कर्मों से पढ़ो,
मैंने इंसान को इंसान से बेहतर देखा है।

चलो ऐसा कोई दीपक भी जलाएं मिलकर,
जिसकी लौ में हर इक दिल ने सफ़र देखा है।
-काजोल उइके
 
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2 महीने पहले

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