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इश्क़ ही तो था।

                
                                                         
                            वो जो मनाने के लिए तुझको लिखे,
                                                                 
                            
वो लफ़्ज़ भी तुझे अच्छे ना लगे।
ऐसी भी क्या नाराजगी हमसे,
तेरे अपने ही तो हैं।
गैरों के साथ मुस्कराते देखा हैं तुझे,
बस एक हम ही थे जो तेरी चाहत को तरस गए।
लोगों से बढ़कर चाहा तुझे,
तूने ना-समझ का इल्ज़ाम दे दिया हमें।
ज़माना जीत गया, और इश्क़ हार गया,
खेर, इश्क़ ही तो था, इश्क़ ही तो था,
ज़माने की आँखों में ना मोल कोई इश्क़ का,
फ़िर रोये क्यूँ तू कैसर, इश्क़ ही तो था ।
हार गया, वह इश्क़ ही तो था।
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2 महीने पहले

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