ग़ज़ल -"मियाँ तुम"
हद करते हो यार मियाँ तुम।
क्यूँ करते हो तकरार मियाँ तुम?
तुम अपनी जिद, गुस्सा के कारण,,,,
कर दी खड़ी, दीवार मियाँ तुम।
जरा सोच समझ के बतलाओ तुम,,,
क्या ऐसे करते, मनुहार मियाँ तुम।
जब साथ नहीं रह सकते तो फिर,,,
क्यूँ करते, इंतजार मियाँ तुम।।
तुम जीवन भर के साथी थे न,,,,,
क्यूँ छोड़ चले संसार मियाँ तुम।
आ पास जरा सा,,, गले लगा के,,,,
कर मुझपे उपकार मियाँ तुम।।
दिल से..............
-जयशंकर सिंह बाघेल
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