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चूडियों की वो खनखनाहट

                
                                                         
                            चूडियों की वो खनखनाहट
                                                                 
                            
मुझे अक्सर याद आती है
याद है मुझे वो हर सुबह
जब वो कान में फुसफुसाती
और चूडियों की ध्वनि
एक नया संगीत बनाती
उस संगीत में
एक रस था मधुरता का
एक रस था उत्तेजना का
उसकी सॉसों में
एहसास था मीठेपन का
एहसास था बचपन का
उस संगीत की मासूमियत
अक्सर मुझे बुलाती है
चूडियों की वो खनखनाहट
मुझे अक्सर याद आती है
अब सुबह तो हर रोज होती है
पर चलने की उत्तेजना
हर रोज ढेर होती है
कभी गिनता हॅू दिन अपने
तो कभी बुनता हॅू
अतीत के वो सपने
बीते लम्हों की बुनियाद
रह रह कर मुस्कराती है
चूडियों की वो खनखनाहट
मुझे अक्सर याद आती है
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2 दिन पहले

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