दिल ऐ नाशाद को शाद करे कोई
मुझ गुज़रे ज़माने को याद करे कोई
अपनी नाकामी पे उदास हो क्यों
क्या बचा था जो आबाद करे कोई
हूँ अब क़ाएल कैद-ऐ- तन्हाई का
जंजीर हूँ खुद क्या आज़ाद करे कोई
तस्सली तो दे दी गुज़रते वक़्त ने
आके फिर मुझे बर्बाद करे कोई
ये ग़म बड़े काम आए हैं जमशेद
क्यों खुशियो की फ़रियाद करे कोई
-नूर हसन
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