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शायद उल्फ़त में ही कुछ कमियाँ होती हैं, तभी दीवानों के दरमियाँ दूरियाँ होती हैं।

                
                                                         
                            शायद उल्फ़त में ही कुछ कमियाँ होती हैं,
                                                                 
                            
तभी दीवानों के दरमियाँ दूरियाँ होती हैं।

वीराने को देखकर आखिर बे-दिल क्यों है दिल,
वीराने में भी अपनी गहराइयाँ होती हैं

तिरछी नज़रों से उसने मुझको यूँ देखा,
मेरे ख़्वाबों में अब शहनाइयाँ होती हैं।

एक तुमने मुझसे ख़फ़ा होना क्या छोड़ दिया,
मुझे अब रुस्वाइयाँ ही रुस्वाइयाँ होती हैं

मेरी नज़्मों पर गर्द-ओ-ग़ुबार जमा हुआ है,
हर रेज़ा-ए-ख़ाक में तेरी निशानियाँ होती हैं।

मैं जब भी अपनी शादी का मौज़ू छेड़ू,
हर बार तुम्हारी कुछ मजबूरियाँ होती हैं।

टूटे हुए दिल को लगाना चाहते हो 'राही'
अक्सर इस आरज़ू पर हैरानियाँ होती हैं।
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3 महीने पहले

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