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शब्द और मौन

                
                                                         
                            अक्सर कहते लोग "स्त्रियाँ बहुत बोलती हैं",
                                                                 
                            
पर जब वो चुप हो जाएँ, तो पूछते "क्या हुआ?" फिर।

शिकायत शब्दों से पहले भाव को समझ लेना,
हर बात के पीछे एक दर्द भी छुपा होता है।

संवाद ही रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत है,
बोलना कमी नहीं, दिल का आईना है।

सम्मान से सुनो, धैर्य से समझो बात,
शब्दों में मर्यादा हो, सुनने में हो साथ।

कोई घर की नींव बाहर से संभालता है,
कोई अपनों के मन को शब्दों से संभालता है।

दोनों के बिना परिवार का संतुलन अधूरा,
एक-दूसरे की कद्र से ही रिश्ता होता है पूरा।

जहाँ सुनने की संवेदनशीलता और बोलने की इज्जत है,
वहीं घर में सुख, शांति और अपनापन बसता है।
- जगदीश प्रसाद शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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