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अंतर्मन में

                
                                                         
                            कुछ न कुछ तो सदैव चलता रहता है अंतर्मन में,
                                                                 
                            
पुरानी यादों का मेला सा लगता है हर पल में।

जो अपने थे कभी, बीच राह छोड़ गए,
दूसरी दुनिया में जाकर हमसे दूर हो गए।

अब सोच-सोच कर दिल ये पछताता है,
क्यों न हमने उनके लिए कुछ खास किया था।

न कर सके जो उनके लिए, उसका मलाल है,
और खुद के लिए भी वही अधूरा हाल है।

हूक उठती है सीने में, एक सवाल बनकर,
जो बीत गया उसे अब कैसे वापस लाएं?

इसलिए अंतर्मन कहता है एक ही बात,
जो साथ हैं आज, उन्हें भरपूर प्यार दो।
कल का भरोसा नहीं, आज को संवार दो।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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