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पिपीलिका का इशारा

                
                                                         
                            पिपीलिका ने आसमाँ का इशारा पढ़ लिया।
                                                                 
                            
आने वाले मौसम का नजारा पढ़ लिया।

रात को भटक रहा था आसमाँ में अंधेरा।
तभी तो हमने चमकता सितारा पढ़ लिया।

दुश्मन नीद की गोली डाल रहे थे चाय में।
हमने उनकी साजिश का इरादा पढ़ लिया।

भंवर ने सोचा डूब जाएगी कश्ती मगर-
मुकद्दर ने पहले ही किनारा पढ़ लिया।

खामोश थी ज़बान, लव थे सिले हुए।
मगर हमने निगाहों का इशारा पढ़ लिया।
.... जगदीश चंद्र कापड़ी।
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2 महीने पहले

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