दिल मे दर्द चेहरे पे शिकन नहीं देखी
माथे पे लकीरों की सुकड़न नहीं देखी
कैसा अजीब वास्ता था इश्क़ से पड़ा
इश्क़ ने नफरतों की उलझन नहीं देखी
तुम आज सो रहो गैरों की बांहों मे
तुमने कभी यार मेंरी तड़पन नहीं देखी
ऐ गैर के कहने पर मुझे क़त्ल करने वाले
दफ़ना मुझे जिन्दा मेरी धड़कन नहीं देखी
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