आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चंदा चाहिए

                
                                                         
                            मइय्या मुझे खेलन को, चंदा चाहिए ।
                                                                 
                            
जो ना दे तू चांद खिलौना , आऊं ना तेरे पास मेरी मां
मां क्या तुझको नहीं लल्ला चाहिए।

सुन लाला, मैं तुझको समझाऊ ।
चंदा तो नहीं, चंदा जैसी दुल्हनिया लाऊं।

सुन मइय्या, शपथ तेरी मैं खाऊं।
बनके दूल्हा चांद अभी घर लाऊं ।
कल -परसों की बात दूर है , मैं तो अबही ब्याह रचाऊ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर