लोग शिकायत हैं करते अब यार कहाँ तुम हो रहते।
चाय पिया नहिं गा कबसे यह बात सभी हमसे कहते।
होटल में अब तो चलिए कप चाय जहाँ हम थे गहते।
भाव भरी बतिया सुनिकै हम डोलि गए बहते बहते।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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