मानुष का तन पाइ गयो रखिए मन में कछु बैर नहीं।
अंश यहाँ पर ईश्वर के सब हैं अपने लखु गैर नहीं।
ध्यान करो परमातम का करना जग में बस सैर नहीं।
कर्म करो जग में शुभ ही वरना समझो फिरि खैर नहीं।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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