झूमत है तरू पाय बयारि मुला कछु आस दिखाय परै ना।
धान सुखाय रहे बिनु नीर किसानन का जिउ धीर धरै ना।
घेरि रही बदरी अतनी करिया करिया मुलु बूँदु गिरै ना।
ऊमस से सब व्याकुल हैं मनु बुद्धि कुछू अब कामु करै ना।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
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