लोग जहाँ कम होइ वहीं पर ठीक हुवै बस हाथ मिलाना।
भीड़ हुवै जब दूरि हटै तब जोरि लियै कर होइ सुजाना।
जीवन है अनमोल यहाँ पर ठीक नहीं क्षण व्यर्थ गँवाना।
बुद्धि प्रयोग करो जग में उर के सब नाहक भाव लुटाना।
-इन्द्र प्रसाद 'रत्नेश'
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