चरण दबाना यदि सीख नहीं पाए हो तो, मारग सफलता का बड़ा ही कठिन है।
तेल और पालिश भी इसमें जरूरी होती, बाबू जी भी रीझते न इसके तो बिन है।
यदि ये न हो पाए तो जी हजूरी कर लीजै, चाय पानी हेतु नोट दीजै गिन गिन है।
वरना भटकते रहोगे बंधु काम हेतु, कहोगे हमेशा ही खराब आज दिन है।
-इन्द्र प्रसाद लोधी 'रत्नेश'
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