आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

वतन पर मरो

                
                                                         
                            बता में रहा हूँ ये अपना तकाजा
                                                                 
                            
मुहब्बत में निकलेगा सबका जनाज़ा

बने हो बफादार जो इश्क़ के तुम
मिलेगा तुम्हें बेबफा का तमाचा

जो लूटे वतन को बने वो भी हाकिम
पता जब चलेगा कि होगा खुलासा

पड़ो इश्क़ में तुम बनोगे नकारा
वतन पर मरो नाम होगा तुम्हारा
-इम्तियाज़ रज़ा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर