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खूब होते हैं

                
                                                         
                            हसीं चेहरा अगर हो तो, दीवाने खूब होते हैं,
                                                                 
                            
अभी छोटी-सी उम्रों में, कई महबूब होते हैं।
हसीनों की गली में तो, तमाशाई बहुत देखे,
मुसीबत जब भी आती है, कहाँ महबूब होते हैं।
कि बातें राज़ की हों तो, अपनों से बचा करना,
यहीं दुश्मन के अक्सर ख़ास ही मकतूब होते हैं।
-इम्तियाज़ रज़ा अली खान
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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