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हंसता था वो

                
                                                         
                            हंसता था वो मुस्कुराता था वो
                                                                 
                            
कभी कभी गुनगुनाता था वो

जाने किसकी नज़र लगी
पेशानी पर शिकन दिखी

काम का प्रैसर घर बार की फ़्रिक
नहीं किया किसी से जिक्र

पिसता रहा दिन रात वो
भूल गया सब शौक वो

काम तो रहता अप टू डेट
सेहत हो गई आउट ऑफ डेट

एक दिन यू ही चलते चलते
खुद से उसकी बात हुई

पूछा दिल ने आखिर कब तक
आंखो से बरसात हुई

तब जाकर समझा उसने
सबसे जरुरी मैं भी हूँ

दुनिया भर की भागदौड़ में
थोड़ा सा अधूरा मैं भी हूँ

अब फिर थोड़ा हंसता है वो
कभी कभी गुनगुनाता है वो

काम अभी चलता है
मगर खुद को भी वक़्त दिलाता है वो
-रियो
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2 महीने पहले

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