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मन का मधुमास

                
                                                         
                            क्यों खोया सा है आकर्षण तुम्हारा,
                                                                 
                            
क्या तुम्हारे चेहरे पर धूप पड़ती नहीं,
तुम रहते कहा हो दिनभर,
क्या तुम इस तपती जगह से गुजरते नहीं,
लगता है तुमने अपनी मंजू, मंजूषा में कही छिपा दी,
इसलिए तुम्हे इतनी तेज धूप कभी लगती नहीं,
ये मन का मधुमास प्रिय जब एक बार गुजर जाता है,
तब तुम्हारे यौवन पर दीमक लगते देर होती नहीं।
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1 सप्ताह पहले

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