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समाज की आत्मा : भाषिक स्वाभिमान

                
                                                         
                            पोवारी संस्कृति से
                                                                 
                            
पोवारी भाषा पर निर्भर।
अना पोवारी भाषा से,
भाषिक स्वाभिमान पर निर्भर।।

संस्कारों की पहचान से
पोवारी भाषा पर निर्भर।
अना पोवारी भाषा से,
भाषिक स्वाभिमान पर निर्भर।।

समाज की एकता से
पोवारी भाषा पर निर्भर।
अना पोवारी भाषा से,
भाषिक स्वाभिमान पर निर्भर।।

पोवारी संस्कार से
पोवारी भाषा पर निर्भर।
अना पोवारी भाषा से,
भाषिक स्वाभिमान पर निर्भर।।

समाज की शान से
पोवारी भाषा पर निर्भर।
अना पोवारी भाषा से,
भाषिक स्वाभिमान पर निर्भर।।

समाज को शामियाना से
पोवारी भाषा पर निर्भर।
अना पोवारी भाषा से,
भाषिक स्वाभिमान पर निर्भर।।

समाज की आत्मा से
समाज को भाषिक स्वाभिमान।
भाषिक स्वाभिमान पर,
निर्भर से भूत भविष्य वर्तमान।।

-ओ सी पटले
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एक महीने पहले

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