मैं पराया ही था जहान में क्या?
ग़म ही उतरेगा इस मकान में क्या?
मोल मेरा लगा न पाया कोई
दीमकें लग गईं सामान में क्या?
जिस पे भी मैंने एतबार किया
ख़ंजर ही था उसकी ज़बान में क्या?
मुझ को अपनाया ही नहीं तुमने
कुछ कमी थी मेरी पहचान में क्या?
थक गया हूँ मैं इस ज़माने से
और कुछ बाक़ी है इम्तिहान में क्या?
सब ने बे-क़द्र ही किया मुझको
दाग़ ही था मेरे ईमान में क्या?
लोग धोखे ही दे गए 'लाला'
झूठ ही बिकता है दुकान में क्या?
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